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अनुभव

सच्चे लोग। लंबी यात्राएँ।

कुछ संबंध एक बातचीत से आगे जाते हैं। ये उन लोगों के अनुभव हैं जो जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर वर्षों से, कभी-कभी दशकों से, विरुपाक्ष अंकित जैन के संपर्क में रहे हैं।

सात द्वार

सात द्वार। सात यात्राएँ।

नीचे हर व्यक्ति अलग समय पर, अलग हालात में, एक अलग द्वार से गुज़रा है।

सर्जरी के दौर में, और उसके बाद भी

मैं सबसे ज़्यादा उनके निःस्वार्थ स्वभाव और हमेशा मदद के लिए तत्पर रहने की भावना की क़द्र करती हूँ।

दो दशकों से भी अधिक समय से उमा तुली जी और विरुपाक्ष का संबंध विश्वास, आस्था और मार्गदर्शन पर आधारित रहा है। वर्षों से, जीवन के कठिन समय में उमा जी और उनका परिवार विरुपाक्ष से मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त करता रहा है। जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर उन्होंने आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सहारा दिया है।

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2017 में उमा जी को एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती का सामना करना पड़ा, जब उन्हें ओपन-हार्ट सर्जरी की आवश्यकता हुई। इस कठिन समय में विरुपाक्ष का आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सहयोग उमा जी और उनके परिवार के लिए शक्ति का स्रोत बना। उनके मार्गदर्शन और प्रार्थनाओं से सात घंटे की सर्जरी की तैयारी के दौरान परिवार को भरोसा और ढाढ़स मिला। सर्जरी सफल रही।

बाद में आई चुनौतियों के दौरान भी उनका मार्गदर्शन उमा जी के लिए आश्वासन का स्रोत बना रहा। हाल ही में एक और सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उमा जी को काफी दर्द हो रहा था। जब उन्होंने विरुपाक्ष से संपर्क किया, तो उन्होंने भगवान शिव को एक विशेष फूल अर्पित करने का सुझाव दिया। उमा जी ने ऐसा ही किया। वर्षों से उनके संबंध का हिस्सा रहे विश्वास और भक्ति के सरल कार्यों से उन्हें सुकून मिला।

समय के साथ विरुपाक्ष, उमा जी के परिवार और अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट के उनके कार्य का भी अभिन्न हिस्सा बन गए। बड़ी चुनौतियों से लेकर रोज़मर्रा के फैसलों तक, उनका परिवार और संस्था के सदस्य अक्सर मार्गदर्शन और आश्वासन के लिए उनसे संपर्क करते हैं। जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर उनकी उपस्थिति और सहयोग लगातार बना रहा है।

उमा जी के लिए विरुपाक्ष की सबसे खास बात यह है कि वे बिना किसी अपेक्षा के दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं। वे वर्षों से उनके परिवार के प्रति दिखाई गई देखभाल और प्रतिबद्धता को महत्व देती हैं और अपने जीवन में उनका मार्गदर्शन पाकर स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हैं।

वह बारिश जो थम गई

उनका धैर्य, सकारात्मकता और मार्गदर्शन इन वर्षों में एक स्थिर सहारा रहा है।

टीवी और फ़िल्म कलाकार राजश्री सीम की पहली मुलाकात विरुपाक्ष से लगभग 2007–2008 में दूरदर्शन के एक प्रोजेक्ट पर काम करते समय हुई। शुरुआत में यह एक पेशेवर परिचय था, जो जल्द ही विरुपाक्ष और उनके परिवार के साथ एक आत्मीय संबंध में बदल गया। शुरुआती मुलाकातों की सहजता और अपनापन तथा साथ काम करते हुए बिताए समय के साथ, राजश्री धीरे-धीरे उनके परिवार का हिस्सा बन गईं।

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राजश्री को बुराड़ी में हुई शूटिंग का एक वाकया आज भी याद है। एक एपिसोड की शूटिंग लगभग पूरी होने वाली थी कि अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण सभी लोग परेशान थे और उन्हें लग रहा था कि अब शूटिंग पूरी करना मुश्किल होगा। लेकिन विरुपाक्ष को भरोसा था कि शूटिंग पूरी हो जाएगी। कुछ देर बाद बारिश थम गई और टीम ने अपना काम पूरा कर लिया। शूटिंग खत्म होते ही एक बार फिर तेज़ बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते सड़कों पर पानी भर गया और गाड़ियों का निकलना मुश्किल हो गया। ऐसे में विरुपाक्ष और उनकी टीम ने यह सुनिश्चित किया कि राजश्री सुरक्षित अपने घर पहुँचें।

इस पूरे अनुभव ने राजश्री के मन में विरुपाक्ष की आध्यात्मिक समझ को लेकर जिज्ञासा पैदा की और धीरे-धीरे उनके मार्गदर्शन में उनकी रुचि बढ़ने लगी।

समय के साथ राजश्री ने केवल बड़ी चिंताओं के लिए ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की परेशानियों, पारिवारिक मामलों और उन पलों में भी विरुपाक्ष से संपर्क करना शुरू किया, जब वे दुखी या असमंजस में होती थीं। वे बताती हैं कि जब भी उन्हें किसी से बात करने की ज़रूरत होती, वे उन्हें फ़ोन कर सकती थीं। उन्हें भरोसा था कि विरुपाक्ष धैर्य से उनकी बात सुनेंगे, चाहे देर रात ही क्यों न हो। बच्चों को लेकर चिंता हो, घर की कोई परिस्थिति हो या यात्रा की तैयारी, उनका मार्गदर्शन और आश्वस्त करने वाले शब्द राजश्री के जीवन का अहम हिस्सा बन गए।

यह विश्वास उनके पति और बच्चों तक भी पहुँचा, जो अपने सवालों या चिंताओं के लिए विरुपाक्ष से संपर्क करते हैं। राजश्री के लिए वे केवल मित्र नहीं रह गए हैं। परिस्थिति के अनुसार वे उन्हें मित्र, मार्गदर्शक और आध्यात्मिक दिशा देने वाले व्यक्ति के रूप में देखती हैं। उनका विरुपाक्ष के परिवार के साथ भी गहरा आत्मीय संबंध है, जो इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

विरुपाक्ष को लगभग दो दशकों से जानने के सफ़र को याद करते हुए राजश्री इसे बेहद अर्थपूर्ण और शब्दों में बयान करना कठिन बताती हैं। वे सबसे अधिक उस विश्वास को महत्व देती हैं जो उनके मन में विरुपाक्ष के प्रति बना है, साथ ही उस धैर्य और सकारात्मकता को भी, जिसके साथ वे हर बार उनके संपर्क करने पर जवाब देते हैं। उनके लिए यह स्थायी संबंध याद दिलाता है कि जीवन के अलग-अलग चरणों में किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मौजूदगी कितनी मायने रख सकती है।

सकारात्मक सोच से आगे का नज़रिया

उनके मार्गदर्शन ने अक्सर मुझे वह देखने में मदद की जो मैं अपने लिए नहीं देख पा रही थी।

प्रज्ञा और उनका परिवार 25 वर्षों से भी अधिक समय से अपने गुरु, ननुआ जी, के साझा संबंध के माध्यम से विरुपाक्ष को जानता है। कम उम्र में हुए परिचय से विश्वास पर आधारित ऐसा रिश्ता बना, जो उनके जीवन और परिवार की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वर्षों से, कठिन समय में वे मार्गदर्शन और एक अलग दृष्टिकोण पाने के लिए विरुपाक्ष से संपर्क करते रहे हैं, खासकर जब उन्हें स्पष्टता की आवश्यकता होती थी।

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2003 में जब वे वापस अमेरिका गईं, तो उनके जीवन में एक बेहद चुनौतीपूर्ण दौर आया। उस समय वे अक्सर मार्गदर्शन और आश्वासन के लिए विरुपाक्ष से संपर्क करती थीं। वे उन अनुभवों का विवरण निजी रखना पसंद करती हैं, लेकिन उन्हें एक उत्कृष्ट मार्गदर्शक बताती हैं, जिन्होंने अनिश्चितता से निपटने में उनकी मदद की। उनके अनुसार, यह सहयोग केवल उनके अपने जीवन तक सीमित नहीं रहा। उनके भाई, बहन और माता-पिता भी वर्षों तक विरुपाक्ष के संपर्क में रहे।

विरुपाक्ष के साथ उनके परिवार के संबंध में ऐसे पल भी आए, जब रिश्तेदारों को निजी जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्हें याद है कि उनकी एक मौसी को गर्भधारण से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था और उस दौरान विरुपाक्ष का आध्यात्मिक मार्गदर्शन आस्था और सहयोग का स्रोत बना रहा। उनके लिए, इन अनुभवों ने आध्यात्मिक मार्गदर्शन के महत्व को और स्पष्ट किया, विशेषकर तब जब लोग ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं जिन्हें अकेले समझना या सँभालना कठिन होता है।

वर्षों के दौरान उनका यह विश्वास बना है कि हर चुनौती का सामना केवल सकारात्मक सोच के सहारे नहीं किया जा सकता। कभी-कभी लोगों को किसी बाहरी व्यक्ति के दृष्टिकोण की ज़रूरत होती है, जो उन्हें अपनी तत्काल परिस्थितियों से आगे देखने और आगे बढ़ने का कोई दूसरा रास्ता समझने में मदद करे। वे विरुपाक्ष के मार्गदर्शन को इसी रूप में देखती हैं: भ्रम और असमंजस के क्षणों में आश्वासन और आध्यात्मिक समझ का स्रोत, जब व्यक्ति और परिवार यह तय करने में कठिनाई महसूस करते हैं कि आगे क्या करना चाहिए।

शून्य से सब कुछ बनाना

लगभग कुछ न होने से लेकर अपने लिए सब कुछ रच लेने तक।

विरुपाक्ष अंकित जैन के साथ मनीषा की यात्रा 2004 में उनके जीवन के एक कठिन दौर में शुरू हुई। वे ऐसे परिवार से आती थीं जहाँ उन्हें लगता था कि बेटियों को बेटों के समान अवसर नहीं मिलते। शिक्षा और निजी जीवन में वे पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर चुकी थीं। जब उनकी शादी में देरी हुई, तो आसपास के सवालों और टिप्पणियों ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं उनमें ही कोई कमी तो नहीं है। इसी दौरान उनकी एक मित्र ने उनका परिचय विरुपाक्ष से कराया। पहली मुलाकात में विरुपाक्ष ने उनकी जन्मपत्री देखी, उन्हें विवाह को लेकर आश्वस्त किया और बताया कि उनका विवाह किस तरह के व्यक्ति से होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मनीषा को एक विशेष उपाय करना होगा। उस समय मनीषा के लिए उनकी बातों पर विश्वास करना कठिन था, इसलिए उन्होंने उनकी सलाह का पालन नहीं किया।

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जब अंततः मनीषा का विवाह हुआ, जैसा कि विरुपाक्ष ने बताया था, तो उनके जीवन में एक और पीड़ादायक दौर आया। छह महीने के भीतर उनके पति उन्हें छोड़कर चले गए और मनीषा को इस परिस्थिति का सामना अकेले करना पड़ा। इस कठिन समय में, जब वे दोबारा विरुपाक्ष के संपर्क में आईं, तो धीरे-धीरे उन्होंने उन्हें अपनी ज़िंदगी को फिर से सँवारने के लिए प्रेरित करना शुरू किया। वे मनीषा को तैयारी करने, प्रयास जारी रखने और छोटे-छोटे कदम उठाकर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने लगे। जब मनीषा को आगे का रास्ता दिखाई देना कठिन लग रहा था, तब उनका मार्गदर्शन उनके लिए आशा का स्रोत बना।

मनीषा अंततः अपने भविष्य को सँवारने के लिए जर्मनी चली गईं, लेकिन यह सफ़र आसान नहीं था। उनका वीज़ा और छात्रवृत्ति रद्द हो गए और उन्हें एक से अधिक बार नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। लगभग खाली हाथ जर्मनी लौटने पर भी उन्होंने विरुपाक्ष के मार्गदर्शन और अपने गुरु जी के आशीर्वाद के साथ प्रयास जारी रखे। उन्हें दोबारा छात्रवृत्ति मिली। जब उससे उनके खर्चों का केवल एक हिस्सा पूरा हो पाया, तो उन्हें विश्वविद्यालय में काम करने का अवसर भी मिला। पीएचडी पूरी करने के बाद भी नौकरी ढूँढ़ना आसान नहीं था। उन्हें मिले छोटे-छोटे अवसरों ने आगे बढ़ने में मदद की और धीरे-धीरे उन्होंने अपना पेशेवर परिचय बनाया, जिसके चलते वे आज के अपने पद तक पहुँचीं।

पेशेवर अनिश्चितताओं और निजी चुनौतियों के दौरान विरुपाक्ष का सहयोग मनीषा के साथ लगातार बना रहा। हाल की एक घटना उन्हें विशेष रूप से याद है, जो उनकी नौकरी से जुड़ी चिंता के बारे में थी। जब उन्होंने विरुपाक्ष को एक ऐसी सहकर्मी के बारे में बताया, जिसके कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, तो उन्होंने पूछा कि क्या वह सहकर्मी चश्मा पहनती है, विशेष रूप से चौकोर फ़्रेम वाला। मनीषा बताती हैं कि उन्होंने पहले उस सहकर्मी के रूप पर ध्यान नहीं दिया था, लेकिन बाद में उसकी तस्वीर देखी तो वह विवरण सही निकला। उनके लिए यह अनुभव विरुपाक्ष के मार्गदर्शन पर भरोसा और गहरा करने वाला था।

आज मनीषा पीछे मुड़कर अपने सफ़र को देखती हैं, तो उन्हें याद आता है कि कैसे वे उस समय से आगे बढ़ीं, जब उन्हें बहुत कम सहयोग मिलता था, और उन्होंने ऐसा जीवन और करियर बनाया जिसकी कभी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। वे इस यात्रा में विरुपाक्ष के मार्गदर्शन और गुरु जी के आशीर्वाद को शक्ति के महत्वपूर्ण स्रोत मानती हैं। उनकी कहानी परिवारों के लिए एक संदेश भी देती है: जब बेटियों पर भरोसा किया जाता है और उन्हें सहयोग मिलता है, तो वे भी कठिन परिस्थितियों से उबरकर स्वतंत्र जीवन बना सकती हैं। उनके अपने शब्दों में, उनका सफ़र शून्य से सब कुछ बनाने का रहा है।

जो परिवार बन गए

उन्होंने मुझे कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं अकेली इन बातों का सामना कर रही हूँ।

विजय मीनू लगभग एक दशक से विरुपाक्ष को जानती हैं। उनके जीवन के एक कठिन दौर में शुरू हुआ परिचय धीरे-धीरे विश्वास, आस्था और अपनेपन की गहरी भावना पर आधारित संबंध में बदल गया। जब उन्होंने पहली बार विरुपाक्ष से संपर्क किया, तो वे अपनी कुछ निजी चुनौतियों के दौरान मार्गदर्शन चाहती थीं। वर्षों में वे ऐसे व्यक्ति बन गए, जिनसे वे और उनका परिवार जीवन में अनिश्चितता महसूस होने पर संपर्क कर सकते हैं।

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वे बताती हैं कि विरुपाक्ष ने कई चुनौतियों के दौरान उनका सहयोग किया है, जिनमें आर्थिक कठिनाइयाँ, उनके और उनके बेटे के स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएँ तथा पारिवारिक समस्याएँ शामिल हैं। दिन में मार्गदर्शन की ज़रूरत हो या देर रात, उन्हें पता था कि वे उनसे संपर्क कर सकती हैं। उनके द्वारा बताए गए उपाय और सलाह इन कठिन दौरों से निपटने के उनके तरीके का महत्वपूर्ण हिस्सा बने।

हालाँकि, विजय मीनू के लिए यह रिश्ता केवल मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है। वे विरुपाक्ष और उनके परिवार को ऐसा सहारा मानती हैं, जो उन समयों में उनके साथ खड़े रहे जब उन्हें लगता था कि उनके पास मदद के लिए बहुत कम लोग हैं। उनकी मौजूदगी ने जीवन के उतार-चढ़ाव के दौरान उन्हें आश्वासन दिया है और इस रिश्ते को सामान्य संबंध से कहीं अधिक गहरा बना दिया है।

उनके लिए सबसे अधिक मायने उस देखभाल और सहयोग के हैं, जो उन्हें बिना किसी अपेक्षा के मिला। वे वर्षों से विरुपाक्ष और उनके परिवार के लगातार साथ देने के लिए दिल से आभार व्यक्त करती हैं। आज भी जब कोई चिंता सामने आती है, तो वे मार्गदर्शन के लिए उनसे संपर्क करती हैं।

उन्हें आशा है कि एक दिन वे विरुपाक्ष और उनके परिवार द्वारा किए गए सभी कार्यों के बदले उन्हें कुछ लौटा सकेंगी। तब तक, उनके संबंध के केंद्र में कृतज्ञता और विश्वास बने हुए हैं। उनकी यात्रा याद दिलाती है कि कभी-कभी, हमारे सबसे कठिन समय में हमारा साथ देने वाले लोग ही सच्चे अर्थों में परिवार बन जाते हैं।

एक ग्रेड, एक भोजन, एक नौकरी

वे आपको दृष्टिकोण, धैर्य और यह भरोसा देते हैं कि आगे बढ़ने का रास्ता है।

विरुपाक्ष अंकित जैन के साथ भुवनेश का सफ़र 2004 में उनके साझा गुरु, ननुआ जी, के माध्यम से शुरू हुआ। आश्रम में मुलाकात के दौरान भुवनेश को विरुपाक्ष से एक परिचित-सा जुड़ाव महसूस हुआ। वे दिल्ली से थे और भुवनेश की परिस्थितियों को समझ सकते थे। समय के साथ यह शुरुआती परिचय विश्वास पर आधारित संबंध में बदल गया। जीवन में कठिन फैसलों के समय भुवनेश मार्गदर्शन के लिए विरुपाक्ष से संपर्क करने लगे।

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सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक वह था, जब भुवनेश अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे। पिता के निधन के बाद उन्हें अपना काम सँभालने के साथ एक लंबित कोर्स भी पूरा करना था। उनके छात्र वीज़ा की अवधि समाप्त हो चुकी थी और डिग्री प्राप्त करने तथा अपनी कानूनी स्थिति बनाए रखने के लिए कोर्स पूरा करना ज़रूरी था। 2007 में, जब उनके अंतिम ग्रेड में स्नातक होने के लिए आवश्यक अंक नहीं आए, तो उन्हें डर था कि उन्हें एक और सेमेस्टर दोहराना पड़ेगा। उन्होंने विरुपाक्ष से संपर्क किया। विरुपाक्ष ने उन्हें आश्वस्त किया और साईं बाबा के मंदिर जाकर भेंट चढ़ाने का सुझाव दिया। कुछ दिनों बाद उनके प्रोफ़ेसर ने उनसे संपर्क कर बताया कि उनका ग्रेड बदलकर A-minus कर दिया गया है, जिससे वे स्नातक हो सके। भुवनेश के लिए घटनाओं का यह अप्रत्याशित मोड़ बेहद यादगार रहा और इससे विरुपाक्ष के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में उनका विश्वास और मजबूत हुआ।

अगले वर्ष, 2008 की मंदी के दौरान चुनौतियाँ जारी रहीं। नौकरियाँ जाने के कारण रोज़गार पाना कठिन हो गया था। भुवनेश के लिए यह अनिश्चितता विशेष रूप से तनावपूर्ण थी, क्योंकि अमेरिका में रहने की उनकी क्षमता वैध कार्य और आव्रजन स्थिति बनाए रखने पर निर्भर थी। एक बार फिर उन्होंने विरुपाक्ष से मार्गदर्शन लिया। इस बार विरुपाक्ष ने उन्हें सलाह दी कि जब भी किसी ज़रूरतमंद को भोजन देने का अवसर मिले, तो वे ऐसा करें। शुरुआत में भुवनेश सोच रहे थे कि अमेरिका में उन्हें ऐसा ज़रूरतमंद व्यक्ति कैसे मिलेगा। लेकिन एक दिन शिकागो में खरीदारी करते समय एक महिला उनके पास आई और बताया कि उसने खाना नहीं खाया है। भुवनेश उसे पास के एक रेस्तराँ में ले गए और उसके लिए भोजन खरीदा। लगभग एक सप्ताह बाद उन्हें नौकरी मिल गई। भुवनेश इस अनुभव को ऐसे पल के रूप में याद करते हैं, जिसने आस्था, करुणा और दूसरों की मदद करने के महत्व में उनके विश्वास को मजबूत किया।

भुवनेश के लिए ये अनुभव केवल अलग-अलग घटनाएँ नहीं थे। वर्षों से, अनिश्चितता के दौर में, विशेषकर जब उन्हें यह समझने के लिए किसी दृष्टिकोण की ज़रूरत होती कि आगे क्या करना है, वे विरुपाक्ष से संपर्क करते रहे हैं। वे इन बातचीतों से मिलने वाले आश्वासन और दूरदृष्टि को महत्व देते हैं। साथ ही, उन्हें यह याद भी मिलता है कि व्यक्तिगत प्रयास आवश्यक है। भुवनेश के अनुसार, विरुपाक्ष का मार्गदर्शन कार्रवाई करने की जगह नहीं लेता। इसके बजाय, जब परिस्थितियाँ कठिन लगती हैं, तो यह उन्हें धैर्य और आशा के साथ आगे बढ़ते रहने में मदद करता है।

विरुपाक्ष को दो दशकों से भी अधिक समय से जानने के सफ़र को याद करते हुए भुवनेश अपने संबंध को जीवन के सबसे अनिश्चित पलों में मार्गदर्शन का स्रोत मानते हैं। पढ़ाई पूरी करने से लेकर पेशेवर अस्थिरता का सामना करने तक, ये अनुभव उनके साथ रहे हैं और उनकी आस्था को आकार देते रहे हैं। उनकी यात्रा दिखाती है कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन कठिन समय में आश्वासन दे सकता है, जबकि प्रयास करते रहने और दूसरों की मदद करने की इच्छा आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहती है।

खाली जेब से जीवन भर के मार्गदर्शक तक

उनके मार्गदर्शन ने मुझे कई अनिश्चित क्षणों में सहारा दिया है।

पवन जेठवा जी की विरुपाक्ष अंकित जैन से पहचान 2006 में हुई, जब वे महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रहते थे। शुरुआत में उनकी मुलाकात पारिवारिक परिचय के ज़रिए हुई, लेकिन समय के साथ विरुपाक्ष उनके ऐसे मार्गदर्शक बन गए, जिनसे वे अपने परिवार और करियर से जुड़ी बातें खुलकर साझा कर सकते थे।

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एक समय ऐसा आया जब औरंगाबाद छोड़ते हुए पवन जी के पास लगभग पैसे खत्म हो गए थे और उन्हें तुरंत नौकरी की ज़रूरत थी। मुंबई में एक दोस्त के माध्यम से नौकरी का अवसर मिला, लेकिन वेतन क्या होगा, इसे लेकर कोई निश्चितता नहीं थी। विरुपाक्ष ने उनसे ननुआ जी का नाम लेकर जाने को कहा और बताया कि उन्हें अच्छे वेतन के साथ घर के किराये के लिए सहायता भी मिल सकती है। जब पवन जी इंटरव्यू के लिए पहुँचे, तो उन्हें उनकी उम्मीद से बेहतर वेतन की पेशकश हुई। साथ ही, बिना माँगे ही घर के किराये के लिए सहायता भी मिली। इस अनुभव से विरुपाक्ष के मार्गदर्शन पर उनका भरोसा और गहरा हुआ।

कई साल बाद, जब उनकी बेटी अपनी पहली नौकरी के लिए इंटरव्यू दे रही थी, तब भी ऐसा ही एक अनुभव हुआ। पवन जी ने विरुपाक्ष को बताया कि उनकी बेटी वेतन को लेकर क्या उम्मीद रख रही थी। विरुपाक्ष ने अनुमान जताया कि कंपनी पहले कम वेतन की पेशकश करेगी, लेकिन बातचीत के बाद प्रस्ताव बढ़ जाएगा। अगले दिन ठीक ऐसा ही हुआ। कंपनी ने पहले कम वेतन की पेशकश की, लेकिन बातचीत के बाद वेतन उसी स्तर पर तय हुआ, जैसा विरुपाक्ष ने पहले बताया था। पवन जी के लिए यह उनकी बेटी के करियर की शुरुआत का एक यादगार अनुभव था।

पवन जी के लिए विरुपाक्ष का मार्गदर्शन केवल करियर तक सीमित नहीं रहा। उनकी पत्नी की तबीयत खराब होने पर भी वे अक्सर उनसे मार्गदर्शन लेते रहे, कभी-कभी रात के बारह बजे भी। करियर में उतार-चढ़ाव के दौरान, जब भी रोज़गार को लेकर मुश्किलें आईं, वे विरुपाक्ष से सलाह और आश्वासन लेते रहे। समय के साथ उनका यह रिश्ता और गहरा होता गया।

आज, लगभग दो दशकों के इस सफ़र को देखते हुए, पवन जी विरुपाक्ष को केवल “भैया” नहीं, बल्कि गुरु-समान मानते हैं। जीवन के कई मोड़ों पर मिला मार्गदर्शन और सहयोग उनके लिए बहुत मायने रखता है। उनका यह भरोसा उन अनुभवों से बना है, जो इन वर्षों में उनके साथ हुए और जिन्हें वे आज भी अपनी यात्रा का अहम हिस्सा मानते हैं।

आपकी कहानी मायने रखती है।

यदि फ़ाउंडेशन के साथ आपका समय आपके लिए कुछ मायने रखता है, तो हम उसे सुनकर आभारी होंगे।

आपको सब कुछ पहले से समझने की ज़रूरत नहीं।

बस अगले कदम के लिए खुले रहिए।

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